Monday, January 2, 2012

कैसे अब नव वर्ष मनाये


बड़े कड़ाके की सर्दी है
ऊपर से रिमझिम पानी,
नए वर्ष की सर्दी ने बस
याद दिलाई नानी,
सूरज दादा ठण्ड के मारे
छिप गए बादल पार ,
बिना टोप के जो भी निकला
उसको चढ़ा बुखार,
गरम चाय और गरम कचौड़ी
मम्मी आज बनाओ ,
खायेगे कम्बल में घुसकर
बिस्तर में दे जाओ,
दादा पहने बन्दर टोपी
दादी ओढ़े शाल,
फिर भी कट-कट दांत बज रहे
हाल हुआ बेहाल,
कैसे अब नव वर्ष मनाये
बाहर भीतर पानी,
पार्टी किसी और दिन होगी
बिगड़ी आज कहानी .

-कुश्वंश

11 comments:

  1. साल का पहला दिन रविवार
    बाहर बारिश की बौछार
    आज कहीं ना जायेंगे
    और न हम पछतायेंगे
    कम्बल के भीतर घुसकर ही
    नया साल मनायेंगे.

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  2. बहुत प्यारा गीत..नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  3. बहुत अच्छी पोस्ट है सर आपकी।
    मेरी नई पोस्ट को आपकी टिप्पणी का इंतजार है।

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  4. बहुत प्यारी कविता...नव वर्ष की शुभकामनाएँ!

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  5. aapki yah bal-kavita bahut -bahut hi majedaar lagi.
    par is bina mousam ki barsaat ne sab par paani feer diya----
    sachhh---;)
    poonam

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  6. प्यारी कविता...शुभकामनाएँ..

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  7. बहुत प्यारा गीत। धन्यवाद।

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  8. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  9. बहुत खूब लिखा है.. बहुत सुन्दर..

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  10. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  11. गरम चाय और गरम कचौड़ी
    मम्मी आज बनाओ ,
    खायेगे कम्बल में घुसकर
    बिस्तर में दे जाओ,
    दादा पहने बन्दर टोपी
    दादी ओढ़े शाल,
    फिर भी कट-कट दांत बज रहे
    हाल हुआ बेहाल,
    प्रिय कुश्वंश जी मेरा बच्चा मन बहुत खुश हुआ ..सुन्दर बाल गीत ...आनंद आया
    भ्रमर ५

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