Friday, November 25, 2011

बेटी, बेटे से बढकर



दूर देश से उडकर आयी
मैं परियों की रानी
आओ बच्चो तुम्हें सुनाऊं
प्यारी एक कहानी
इक नन्हीं सी परी उड गयी
दूर देश के घर में
उसको वो घर अच्छा लगता
जो था दूर नगर में
बडे उमंग से उसने घर में
अपने पैर उतारे
घर में आयी परी देखकर
निहाल हो गये सारे
मगर ऐक ने कहा
काश ये बेटा होता
बेटों से ही वंश चलेगा
हमें चाहिये पोता
नन्हीं परी बेहाल हो गयी
सोचा कैसी दुनियां
बेटों से अब कैसी होगी
आधी-आधी दुनियां
नन्ही परी लगी सोचनें
कैसे मैं समझाऊं
बेटी, बेटों से बड्कर हैं
कैसे मैं बतलाऊं
बेटी का सम्मान जहां हो
वो घर चमक बिखेरे
अपमान जहां हो जाये इनका
वहां दरिद्रता घेरे
समझ गये जो वहां हो गयीं
बेटी, बेटे से बढकर
रहे नासमझ वहां चिपकते
आंसू अन्जुली भरकर.

Sunday, November 20, 2011

मेरे सपने





मैं हूं एक छोटी सी गुडिया
मेरे सपने भारी,
अभी अभी आयी हूं जग में
खुशियां चाहूं सारी.
मैं सपनों को जगा रही हूं
सोये हैं जो मन में बंद,
पहले किसको पहचानूं
सवाल कठिन,मन में है द्वन्द.
मम्मी की आवाज़ सुनूं या
पापा के मन मे झांकू,
नाना को कोने से देखूं ,या
नानी को सीधे ताकूं.
दादा दादी बुला रहे हैं
लेने को मेरी चुम्मी,
मन करता है टिकट कटाकर
चली जाऊं घुम्मी-घुम्मी.
मामा को मैं जीभ दिखाऊं
चलाऊ पैर की सायकिल,
दोनों हाथ उठाकर जीतूं
मैं अपनें अपनों का दिल.

Saturday, November 5, 2011

बन्दर का लव


बन्दर बोला मम्मी मेरी
कब होगी शादी,
सारे बन्दर  बच्चे वाले 
मेरी उम्र बची आधी, 
पापा कान उमेठकर बोले
अरे निखट्टू नामाकूल,
कामधाम की बात कराकर
शादी-वादी जा तू भूल,
छीन  झपट कर रोटी खाता
मेहनत से  तू जान चुराता,
रोज शिकायत आती घर में 
तू  है नालायक पाजी, 
ऐसे में कौन सा बन्दर 
लडकी देने को है  राजी,  
नटखट तब शर्माकर बोला, 
राज ह्रदय का खोला,  
लोमड़ी से  हुआ है लव,  
वही बनेगी पत्नी अब,  
पापा अब मै नहीं डरूंगा,  
अंतरजातीय  विवाह करूंगा,  
लोमड़ी के घरवाले राजी 
फिर तुमको है क्यों ऐतराज़,  
बोलो हां कहते हो या फिर 
लोमड़ी संग भागू मैं  आज,  
बन्दर बोला सुना बंदरिया
अपने बेटे के रंग ढंग, 
अब तो  अपनी नाक कटेगी
कैसे चले बिरादरी संग  .

-कुश्वंश




Friday, November 4, 2011

सर्दी आयी सर्दी आयी













सर्दी आयी सर्दी आयी
खाओ रबडी,दूध-मलाई
मम्मी देना मफलर कोट
पापा लाकर दो अखरोट 
पंखे,कूलर, ऐसी बाय 
सूरज की गर्मी अब भाय 
आइसक्रीम अब दूर रहो
चाय-काफी की बात करो 
दादा के कट कट दांत करें    
दादी पानी से डरें
अब दोपहर जाना स्कूल
खेल कूद सब जाएँ भूल 
छोटे दिन अब लम्बी  रात
यही है सर्दी की सौगात .

-कुश्वंश