Friday, November 25, 2011

बेटी, बेटे से बढकर



दूर देश से उडकर आयी
मैं परियों की रानी
आओ बच्चो तुम्हें सुनाऊं
प्यारी एक कहानी
इक नन्हीं सी परी उड गयी
दूर देश के घर में
उसको वो घर अच्छा लगता
जो था दूर नगर में
बडे उमंग से उसने घर में
अपने पैर उतारे
घर में आयी परी देखकर
निहाल हो गये सारे
मगर ऐक ने कहा
काश ये बेटा होता
बेटों से ही वंश चलेगा
हमें चाहिये पोता
नन्हीं परी बेहाल हो गयी
सोचा कैसी दुनियां
बेटों से अब कैसी होगी
आधी-आधी दुनियां
नन्ही परी लगी सोचनें
कैसे मैं समझाऊं
बेटी, बेटों से बड्कर हैं
कैसे मैं बतलाऊं
बेटी का सम्मान जहां हो
वो घर चमक बिखेरे
अपमान जहां हो जाये इनका
वहां दरिद्रता घेरे
समझ गये जो वहां हो गयीं
बेटी, बेटे से बढकर
रहे नासमझ वहां चिपकते
आंसू अन्जुली भरकर.

6 comments:

  1. हम बेटियों का कोई जवाब नहीं...प्यारी सी कविता के लिए बधाई.

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  2. बहुत सुन्दर....

    नन्हीं परी बेहाल हो गयी
    सोचा कैसी दुनियां
    बेटों से अब कैसी होगी
    आधी-आधी दुनियां
    नन्ही परी लगी सोचनें
    कैसे मैं समझाऊं
    बेटी, बेटों से बड्कर हैं
    कैसे मैं बतलाऊं

    कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें

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  3. बहुत सुंदर पोस्ट अच्छी लगी,..
    मेरे नए पोस्ट में आज चली कुछ ऐसी बातें, बातों पर हो जाएँ बातें

    ममता मयी हैं माँ की बातें, शिक्षा देती गुरु की बातें
    अच्छी और बुरी कुछ बातें, है गंभीर बहुत सी बातें
    कभी कभी भरमाती बातें, है इतिहास बनाती बातें
    युगों युगों तक चलती बातें, कुछ होतीं हैं ऎसी बातें

    स्वागत है ,.......

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  4. बहुत सटीक और सुंदर प्रस्तुति..

    http://bachhonkakona.blogspot.com/

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  5. प्रिय कुश्वंश जी बहुत सुन्दर प्यारी रचना ...काश सब आप से पिता बनें और इस समाज को एक नयी रौशनी दें ..
    भ्रमर ५
    http://surenrashuklabhramar5satyam.blogspot.com
    बाल झरोखा सत्यम की दुनिया ..में .भी कृपया कभी पधारें

    बेटी, बेटों से बड्कर हैं
    कैसे मैं बतलाऊं
    बेटी का सम्मान जहां हो
    वो घर चमक बिखेरे
    अपमान जहां हो जाये इनका
    वहां दरिद्रता घेरे
    समझ गये जो वहां हो गयीं
    बेटी, बेटे से बढकर
    रहे नासमझ वहां चिपकते
    आंसू अन्जुली भरकर.

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  6. Sundar abhivektti. mere blog http://santam sukhaya.blogspot.com par aapakaa swagat hai, apni prtikriya dekar anugarhit kare. Dhanywaad.

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