Saturday, November 5, 2011

बन्दर का लव


बन्दर बोला मम्मी मेरी
कब होगी शादी,
सारे बन्दर  बच्चे वाले 
मेरी उम्र बची आधी, 
पापा कान उमेठकर बोले
अरे निखट्टू नामाकूल,
कामधाम की बात कराकर
शादी-वादी जा तू भूल,
छीन  झपट कर रोटी खाता
मेहनत से  तू जान चुराता,
रोज शिकायत आती घर में 
तू  है नालायक पाजी, 
ऐसे में कौन सा बन्दर 
लडकी देने को है  राजी,  
नटखट तब शर्माकर बोला, 
राज ह्रदय का खोला,  
लोमड़ी से  हुआ है लव,  
वही बनेगी पत्नी अब,  
पापा अब मै नहीं डरूंगा,  
अंतरजातीय  विवाह करूंगा,  
लोमड़ी के घरवाले राजी 
फिर तुमको है क्यों ऐतराज़,  
बोलो हां कहते हो या फिर 
लोमड़ी संग भागू मैं  आज,  
बन्दर बोला सुना बंदरिया
अपने बेटे के रंग ढंग, 
अब तो  अपनी नाक कटेगी
कैसे चले बिरादरी संग  .

-कुश्वंश




4 comments:

  1. बहुत प्यारी मजेदार कविता...

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  2. बच्चों को तो क्या बड़ों को भी इस बेहतरीन कविता ने आनंदित कर दिया.क्लाइमेक्स जोरदार है.

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  3. प्रिय कुश्वंश जी मजेदार-------मन खुश हो गया .

    भ्रमर ५
    बाल झरोखा सत्यम की दुनिया

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