Friday, September 7, 2012

इन्टरनेट पर ही मनेंगे अब सारे त्यौहार .










नहीं चाहिए खेल खिलौने 

और नहीं टाफी,  बैलून 
अब तो  मन लगाकर पढने 
दूर देश जाना  "रंगून"
गुडिया- गुड्डे की शादी के 
खेल से मत भरमाओ 
कंप्यूटर लाकर दो मुझको 
उसमे नेट लगवाओ 
ट्वीटर पर मैं ट्वीट  करूंगी 
फेशबुक  पर चैटिंग 
इन्टरनेट पर मैं  समझूँगी 
कैसी होती नैटिंग 
स्मार्टफ़ोन और टैबलेट पीसी 
सब अपने औजार्
इन्टरनेट पर ही मनेंगे 
अब सारे त्यौहार .

- कुशवंश 



5 comments:

  1. समसामयिक सी बाल रचना .....बहुत सुंदर

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  2. बहुत सटीक बात लिखी है कुश्वंश जी ! आजकल यही हो रहा है घर-घर !

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  3. यथार्थ का आईना दिखती पोस्ट अब तो यही है ज़माना सभी वार त्यौहार अब तो इंटरनेट पर ही है मानना....

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