Saturday, May 21, 2016

आइसक्रीम के दिन
















सूरज दादा हैं नाराज
फैलाई धरती पर आग
बडों बडों को भी झुलसाया
हम बच्चों को भी डरवाया
आसमान से बरसे अंगारे
ताल तलैया सूखे सारे
बंद हुए हम घर के अन्दर
टीवी के बस हुए सिकन्दर
वर्षा की बूदें अब आओ
कैद से अब आजाद कराओ
मन करता है भरें फर्राटे
शैतानी में कोई न डांटे
खायें आइसक्रीम, रसगुल्ले
गरमी में अब हिप हिप हुर्रे

-कुशवंश

No comments:

Post a Comment