Tuesday, May 10, 2016

सारे दिन मम्मी के होते




हॅप्पी हॅप्पी मदर डे
मुझे समझ नहीं आता
मॉम का होता सारा दिन
मुझको बस इतना भाता
उठते ही बस मम्मी मम्मी
कभी गाल मे , कभी भाल मे
बस सारा दिन चुम्मी चुम्मी
कभी मॉम के पीछे छिपकर
दीदी को बहलाता हू
कभी , किचिन मे फ्रिज के पीछे
भैया से बच पाता हूँ
मम्मी बस , आँखों मे रहतीं
नहीं कभी होती ओझल
अगर एक पल देख न पाऊँ
मन हो जाता है बोझल
सारे दिन मम्मी के होते
एक नहीं होता  है डे
सुबह शाम बस हॅप्पी हॅप्पी
सारे दिन बस मदर्स डे
मम्मी दिन और मम्मी रात
मम्मी है प्यारी सौगात
मम्मी से सारा जहांन है
मम्मी से प्यारी बरसात
सारे  दिन मम्मी के होते
नहीं एक दिन की है बात

-कुशवंश



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