बच्चों का आकाश

Monday, February 29, 2016

मम्मी नहीं जाना स्कूल



















मम्मी नहीं जाना स्कूल
मुझको मत कपड़े पहनाओ
बालों मे न बांधो फूल
नासता भी तैयार करो मत
हमको नहीं जाना स्कूल
रिक्से के पीछे
लटके लटके
डर लगता है झटके से
अंदर बैठूँ तो पिच जाऊ
खड़ी रहूँ तो लटके झटके
टीचर जी  बस डांट पिलातीं
सर जी छूते इधर उधर
वाशरूम भी साफ नहीं है
जाऊ तो मैं जाऊ किधर
आया दिनभर मुह बिचकाती
भैया गाते गाना
बच्चे चोटी खीच डालते
चट कर जाते खाना
मैं तो घर मे ही पढ़ लूँगी
तुम ही मुझे पढ़ाओ
गंदे संदे स्कूलों से
छुट्टी मुझे दिलाओ

- कुशवंश




Saturday, September 14, 2013

हिंदी हमें नहीं आती



अंग्रेजी में  पढ़े  बढे हम
हिंदी हमें नहीं आती 
भाषा की कैसी परिभाषा 
फूटी आँख नहीं भाती 
मम्मी पापा, माम डैड  हैं 
दादा-दादी  ग्रांड 
भैया मेरे नंबर वन हैं 
लगते जेम्स बांड 
दीदी जब कालेज से  आती  
ऐसे  करती एक्शन 
जैसे वो मस्ती चैनल में 
करती जैनेट जैक्शन 
मम्मी हाय हैलो में रमती 
पापा क्लब में बंद 
भैया दीदी पब में जाते 
मन में अन्तर्द्वन्द 
कहाँ गए रावन  के राम 
कहाँ गयी सीता माता 
कहाँ गए राधा और कृष्ण 
कैसे टूट गया नाता 
राम लीला  में मेला देखो 
दीवाली में पपलू
होली में मुह काला करके
बन जाओ  बस बबलू 

Wednesday, March 6, 2013

हिन्दी बहुत डराएँ




मम्मी  मुझसे 
काम न कहना 
मेरा कठिन समय 
सालाना इक्जाम हो रहे 
सर पर सवार है भय 
अंग्रेजी और मैथ की होगई 
है सारी तैयारी 
हिन्दी से डर  लगता मुझको 
रूह कांपती सारी 
क्या ये है बेकार की भाषा 
अक्षर औ मात्राएँ 
संस्कृत के  सब श्लोक और शैली 
मुझको बहुत डराएँ 
सीधी सी , अन्ग्रेजी  भाषा 
न टेढ़ी मात्राएँ 
बचपन से ही  जिंगल  धुन 
रटे  और रटाये 
मास्टर जी से टीचर जी की 
कितनी प्यारी गरिमा 
अंग्रेजी की मेंम की  देखो 
कैसी सुन्दर महिमा 
हिन्दी वाली टीचर  जी की 
कैसी कठिन पढाई 
उन्सठ,उनहत्तर ,उन्यासी ,नवासी 
मुझ्कॊ समझ न आयी 
जैसे तैसे  बीत जाए सब 
होजाए हम पास 
हिन्दी से तौबा हो जाये 
मिल जाए बस क्लास .



Friday, September 7, 2012

इन्टरनेट पर ही मनेंगे अब सारे त्यौहार .










नहीं चाहिए खेल खिलौने 

और नहीं टाफी,  बैलून 
अब तो  मन लगाकर पढने 
दूर देश जाना  "रंगून"
गुडिया- गुड्डे की शादी के 
खेल से मत भरमाओ 
कंप्यूटर लाकर दो मुझको 
उसमे नेट लगवाओ 
ट्वीटर पर मैं ट्वीट  करूंगी 
फेशबुक  पर चैटिंग 
इन्टरनेट पर मैं  समझूँगी 
कैसी होती नैटिंग 
स्मार्टफ़ोन और टैबलेट पीसी 
सब अपने औजार्
इन्टरनेट पर ही मनेंगे 
अब सारे त्यौहार .

- कुशवंश 



Friday, August 31, 2012

देखो खूब भिगोते बादल














देखो कैसे रोते  बादल
पानी कैसे ढोते बादल 
अगर कही बच्चे मिल जाते 
देखो खूब भिगोते बादल 

गली मोहल्ले  बिखरे बादल 
बदली  बनके निखरे बादल  
हरियाली के चादर ताने 
देखो कैसे बिफरे बादल 

सांझ अँधेरा करते बादल 
रात में खूब बरसते बादल 
छप्पर  में बस टप .टप .टप .टप 
देखो खूब टपकते बादल 

फिसले बच्चे गिरे धडाम 
कपड़ों का बस काम तमाम 
घर आँगन में फैला दलदल 
ऐसा बदला लेते बादल 

हम बच्चों से कैसी रार 
भूलो बादल अब तकरार 
आओ हमको गोद उठाओ 
टिप-टिप वाला राग सुनाओ 

-कुश्वंश 




Monday, January 2, 2012

कैसे अब नव वर्ष मनाये


बड़े कड़ाके की सर्दी है
ऊपर से रिमझिम पानी,
नए वर्ष की सर्दी ने बस
याद दिलाई नानी,
सूरज दादा ठण्ड के मारे
छिप गए बादल पार ,
बिना टोप के जो भी निकला
उसको चढ़ा बुखार,
गरम चाय और गरम कचौड़ी
मम्मी आज बनाओ ,
खायेगे कम्बल में घुसकर
बिस्तर में दे जाओ,
दादा पहने बन्दर टोपी
दादी ओढ़े शाल,
फिर भी कट-कट दांत बज रहे
हाल हुआ बेहाल,
कैसे अब नव वर्ष मनाये
बाहर भीतर पानी,
पार्टी किसी और दिन होगी
बिगड़ी आज कहानी .

-कुश्वंश

Friday, December 30, 2011

बैंड वाले अंकल


हमको बड़े भले लगते है
बैंड वाले  अंकल,
प्यारी - प्यारी धुनें बनाते
बैंड वाले  अंकल,
चमक रही रगीली ड्रेस
राजाओं सा सही भेष,
नेपोलियन सा टोप लगाकर
हमें सुनते जिंगल, 
बैंड वाले  अंकल,
इनके बिना नहीं  सज पाती
कोई भी बरात,
थिरक रहे सारे बाराती
सात सुरों के साथ,
तारों जैसे चमक रहे है
जैसे ट्विंकल-ट्विंकल,
बैंड वाले  अंकल.

Tuesday, December 20, 2011

गुडिया की शादी.....


है मेरी गुडिया की शादी,  
कैसे सजे धजे बाराती.  
प्यारी धुनें बजता बैंड,
नाच रहे गुड्डे के फ्रैंड.
जगमग जगमग  जलती लाईट,
हो गयी रंग बिरंगी नाईट. 
गुडिया ले आयी जैमाल, 
गुड्डे जी ने किया कमाल. 
पहले दे दो मोटर कार ,
तभी गले में डालू हार. 
गुड्डे जी के देखे रंग,  
घर वाले सब हो गए दग.
गुडिया बोली वापस जाओ, 
मुझे न काला मुह दिखलाओ. 
लालच का जो हुआ शिकार, 
ऐसा दूल्हा है बेकार .
जिसमे पापा की बर्बादी, 
नहीं चाहिए ऐसी शादी . 

-कुश्वंश

Tuesday, December 13, 2011

गुडिया अलबेली



यहाँ वहां तितली बन उडती
मै गुडिया अलबेली,
परियों के संग आना जाना
मैं अनजान पहेली,
जिस घर में पाती हूँ प्यार
मैं उसको अपनाऊ,
वर्ना टाटा बाय बाय कर
कभी पास ना आऊँ,
मै इतनी सुन्दर दिखती  हूँ
चंदा  भी शर्माए,
मेरे सामने विस्वसुन्दरी
पानी भरने आये,
जो भी देखो गाल नोचता
अपना  प्यार दिखता ,
मैं हंसती हूँ ऊपर ऊपर
अन्दर गुस्सा आता,
गोद मुझे मम्मी की भाये
पापा की बाहों का झूला,
पूरे घर की सैर करू तो
खाना पीना भूला,
दादी कहती सोजा बेटी
दादा कहते आजा,
भैया चिकोटी काट के कहता
और बजाओ बाजा.
मै कहती नानी घर जाऊ
नानी कहे कहानी,
नाना कहते मुझे दिखाओ
कहाँ है रोती रानी.


   





Friday, November 25, 2011

बेटी, बेटे से बढकर



दूर देश से उडकर आयी
मैं परियों की रानी
आओ बच्चो तुम्हें सुनाऊं
प्यारी एक कहानी
इक नन्हीं सी परी उड गयी
दूर देश के घर में
उसको वो घर अच्छा लगता
जो था दूर नगर में
बडे उमंग से उसने घर में
अपने पैर उतारे
घर में आयी परी देखकर
निहाल हो गये सारे
मगर ऐक ने कहा
काश ये बेटा होता
बेटों से ही वंश चलेगा
हमें चाहिये पोता
नन्हीं परी बेहाल हो गयी
सोचा कैसी दुनियां
बेटों से अब कैसी होगी
आधी-आधी दुनियां
नन्ही परी लगी सोचनें
कैसे मैं समझाऊं
बेटी, बेटों से बड्कर हैं
कैसे मैं बतलाऊं
बेटी का सम्मान जहां हो
वो घर चमक बिखेरे
अपमान जहां हो जाये इनका
वहां दरिद्रता घेरे
समझ गये जो वहां हो गयीं
बेटी, बेटे से बढकर
रहे नासमझ वहां चिपकते
आंसू अन्जुली भरकर.

Sunday, November 20, 2011

मेरे सपने





मैं हूं एक छोटी सी गुडिया
मेरे सपने भारी,
अभी अभी आयी हूं जग में
खुशियां चाहूं सारी.
मैं सपनों को जगा रही हूं
सोये हैं जो मन में बंद,
पहले किसको पहचानूं
सवाल कठिन,मन में है द्वन्द.
मम्मी की आवाज़ सुनूं या
पापा के मन मे झांकू,
नाना को कोने से देखूं ,या
नानी को सीधे ताकूं.
दादा दादी बुला रहे हैं
लेने को मेरी चुम्मी,
मन करता है टिकट कटाकर
चली जाऊं घुम्मी-घुम्मी.
मामा को मैं जीभ दिखाऊं
चलाऊ पैर की सायकिल,
दोनों हाथ उठाकर जीतूं
मैं अपनें अपनों का दिल.

Saturday, November 5, 2011

बन्दर का लव


बन्दर बोला मम्मी मेरी
कब होगी शादी,
सारे बन्दर  बच्चे वाले 
मेरी उम्र बची आधी, 
पापा कान उमेठकर बोले
अरे निखट्टू नामाकूल,
कामधाम की बात कराकर
शादी-वादी जा तू भूल,
छीन  झपट कर रोटी खाता
मेहनत से  तू जान चुराता,
रोज शिकायत आती घर में 
तू  है नालायक पाजी, 
ऐसे में कौन सा बन्दर 
लडकी देने को है  राजी,  
नटखट तब शर्माकर बोला, 
राज ह्रदय का खोला,  
लोमड़ी से  हुआ है लव,  
वही बनेगी पत्नी अब,  
पापा अब मै नहीं डरूंगा,  
अंतरजातीय  विवाह करूंगा,  
लोमड़ी के घरवाले राजी 
फिर तुमको है क्यों ऐतराज़,  
बोलो हां कहते हो या फिर 
लोमड़ी संग भागू मैं  आज,  
बन्दर बोला सुना बंदरिया
अपने बेटे के रंग ढंग, 
अब तो  अपनी नाक कटेगी
कैसे चले बिरादरी संग  .

-कुश्वंश




Friday, November 4, 2011

सर्दी आयी सर्दी आयी













सर्दी आयी सर्दी आयी
खाओ रबडी,दूध-मलाई
मम्मी देना मफलर कोट
पापा लाकर दो अखरोट 
पंखे,कूलर, ऐसी बाय 
सूरज की गर्मी अब भाय 
आइसक्रीम अब दूर रहो
चाय-काफी की बात करो 
दादा के कट कट दांत करें    
दादी पानी से डरें
अब दोपहर जाना स्कूल
खेल कूद सब जाएँ भूल 
छोटे दिन अब लम्बी  रात
यही है सर्दी की सौगात .

-कुश्वंश  



  

Sunday, October 30, 2011

दीदी तुमको पढना होगा


















दीदी तुम घर मैं बैठी हो 
हमको भेज रहे स्कूल 
लड़का-लडकी में भेद भाव 
है पापा मम्मी की भूल 
तुमको पढ़ना लिखना होगा 
मास्टरनी जी बन्ना होगा 
बड़ी बड़ी  किताबे पढ़कर  
मेंम  साब भी लगना होगा
दीदी तुम  क्यों चुप बैठी  हो
अपनी बात नहीं कहती हो 
पापा को समझाओ तो 
अपना मन बतलाओ तो  
नहीं अकेले अब जाऊंगा 
दीदी साथ तुम्हे लाऊंगा .

-कुश्वंश